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जानकी पुनःवनवास ४

ll ॐ गंगणपतये ll जानकी पुनःवनवास ४ या दोन्ही विरुद्ध भावाच्या अधीन असलेल्या व्यक्तिंची भावावस्था पाहिल्यानंतर आता राजप्रासादात अन्तःपुरात जाऊया. माता कौसल्या यांच्या ...

जानकी पुनःवनवास ३

ll ॐ गंगणपतये ll जानकी पुनःवनवास ३ आणि दूसरी व्यक्ति अर्थातच भ्राता लक्ष्मणाची अर्धांगी उर्मिला. जिने लग्नानन्तर लगेच काही अवकाश जाण्याआधी पति पासून १४वर्ष दूर राहण्याच...

जानकी पुनःवनवास २

ll ॐ गंगणपतये ll जानकी पुनःवनवास २ अश्याच मनमोहक वातावरणात सजलेल्या , नटलेल्या, रम्य अयोध्या नगरीला जणु स्वर्गाची शोभा प्राप्त झाली होती. सर्व देव देवी देवता , यक्ष, किन्नर, गन...

तू स्मरले जेंव्हा निशिगंधी समयास

तू स्मरले जेंव्हा निशिगंधी समयास

शायरी क्या है

शायरी क्या है किसने कहा शायरी कलाम से लिखी जाती है वो दिलके जाम से, किसीके नाम से, हो जाती है कलम इक जर्रीया है, बस उसे कागजपर उतारने का वो तो दिलके किसी वीरान कोनेमें छिपी होती है  उदास गर है जिंदगी, तो उदासी टपकती है गर प्यार हो किसीका, तो शहद सी लगती है किसीका इंतजार, आंखोमें दिलसे उतारती है लिखे अल्फ़ाज़ में, बस एक शाम सी लगती है कोई रंजोगम में डूबा, लिखेगा शायरी गमेदिलसे कोई किसीके इंतजार में, घिसेगा कलम फिरसे कोई मदहोश नशेमन, अल्फाज लिखे जामसे कोई दिवानासा, लिखेगा खूबसूरत तरीकेसे बस जिसके दिलमे जो तस्वीर छिपी हो, शायरी की किताब में वैसे ही लिखी हो शायद कोसिको मंजिल न मिली हो, बेचारेने शायरी इसी अंदाज में लिखी हो किसीका कुसूर नहीं, कोई दोष भी नही बस नजर खयालात ही है, अफसोस नही, उतर जाते है अल्फाज, कोई शक ही नही शायर का इसमें मानलो, कोई दोष ही नही © शायर : प्रसन्न आठवले ०५/११/२०१७ ११:२५

विरहिणी

विरहिणी

उगवून सांगे सूर्य

उगवून सांगे सूर्य